
@anuthi-kahaniya
माटी की महक और पुराने दौर की यादें। अनूठी कहानियाँ आपको ले चलती हैं उस दौर में जहाँ हर लफ्ज़ में एक दुनिया बसती है। अनुभव कीजिये हिंदी की सर्वश्रेष्ठ लघु कथाओं का जादू।
नंदू जंगल में मुनाफा तलाशने जाता था, पर उसे वहाँ एक ऐसा अनमोल रिश्ता मिला जिसका कोई मोल नहीं था। एक जानलेवा हादसे और झूठे इल्जामों के बीच, उस आदिवासी लड़की ने अपनी सादगी को ही अपनी ढाल बना लिया। सालों बाद, जब वह दोबारा उम्मीद लेकर गया, तो उसे एक गहरा सबक मिला। उसने जाना कि बाज़ार में सामान तो मिल जाता है, पर सुकून की कोई दुकान नहीं होती। यह उस बंजारे की दास्तान है जो बैलों पर सामान का बोझ लादकर ले जाना चाहता था, पर अंत में उसे यादों का बोझ लेकर लौटना पड़ा।
बूढ़ी काकी एक ऐसी कहानी है, जिसमें एक बुज़ुर्ग महिला, अपनी संपत्ति दे देने के बाद भी, अपने ही परिवार में अपमान सहना पड़ता है। यह कहानी रिश्तों, बुढ़ापे के कष्टों और संवेदनाओं को गहराई से दर्शाती है।
दहेज न लेने के कारण यशोदानन्द की हर ओर वाहवाही हो रही है। वह मंच से बड़े-बड़े सिद्धांत बताते हैं, पर क्या उनके इस त्याग की असलियत कुछ और है?
अत्यंत गरीबी में जी रहे बाप-बेटा घीसू और माधव के जीवन में जब एक बड़ी विपत्ति आती है, तो उन्हें समाज से सहायता मिलती है। मगर, ये दोनों उस सहायता का उपयोग अपनी मजबूरी या लालसा के लिए ऐसे ढंग से करते हैं कि आपको इंसानी फितरत पर सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा।
गरीब दुखी चमार अपनी बेटी की सगाई की साइत पूछने के लिए गाँव के पंडितजी के घर जाता है। पंडितजी उसे बिना पैसे दिए ढेरों बेगार का काम सौंप देते हैं। यह मार्मिक कहानी बताती है कि कैसे एक गरीब की जाति और मजबूरी उसे अमानवीयता के कगार पर धकेल देती है।
प्यास से तड़प रहे बीमार पति के लिए गंगी को गंदा पानी पीना मंज़ूर नहीं है। रात के अँधेरे में, वह जाति की बेड़ियों को तोड़कर, गाँव के सबसे ऊंचे कुएँ से पानी चुराने निकलती है। यह कहानी सम्मान और जीवन के लिए उसके संघर्ष को दिखाती है।
हमारे अँग्रेजी दोस्त मानें या न मानें मैं तो यही कहूँगा कि गुल्ली-डंडा सब खेलों का राजा है। अब भी कभी लड़कों को गुल्ली-डंडा खेलते देखता हूँ, तो जी लोट-पोट हो जाता है कि इनके साथ जाकर खेलने लगूँ। न लान की जरूरत, न कोर्ट की, न नेट की, न थापी की। मजे से किसी पेड़ से एक टहनी काट ली, गुल्ली बना ली, और दो आदमी भी आ जाएँ, तो खेल शुरू हो गया।