छठ पूजा एक बहुत ही पवित्र और अनुशासित पर्व है। इस पूजा की सबसे खास बात यह है कि इसे कोई भी कर सकता है। इसमें न जाति का फर्क होता है, न धर्म का, और न ही अमीरी-गरीबी का।
बोस्टन की एक नन्हीं बच्ची को बस भागने की धुन सवार रहती थी। वो गलियों में दौड़ती, वो धूल भरे ढेरों तक जाती, वो तब तक भागती रहती, जब तक गुम न हो जाए। उसके चंचल पैरों को रोकने के लिए, माँ-बाप ने उसे सोफे से बांध दिया। लेकिन, वे उसके मन की उड़ान को कैद नहीं कर पाए। चारदीवारी में बंद होकर भी, उसने भाग निकलने का एक नया और अनोखा रास्ता ढूँढ ही लिया।
पेटन फ़ार्कवर एक पुल पर खड़ा है, उस पल के इंतज़ार में जब पैरों के नीचे से तख्ता हटेगा और ज़िंदगी हाथ से छूट जाएगी। लेकिन जैसे ही तख्ता गिरता है, एक चमत्कार होता है। रस्सी टूट जाती है। वह धड़ाम से नदी में जा गिरता है। गोलियों से बचते-बचाते और जंगल को चीरते हुए, वह अपनी बीवी के पास पहुँचने के लिए बेतहाशा भागता है। लेकिन उसे हर चीज़ अजीब तरह से साफ़ महसूस हो रही है। इस दिमाग घुमा देने वाली कहानी में, पढ़ने वाले को यह तय करना है कि—क्या पेटन फाँसी से बच निकला, या फाँसी उस तक पहुँच गई।
पूस की ठिठुरती रात में किसान हल्कू को बिना कंबल के अपने खेत की रखवाली करनी पड़ती है। एक तरफ कर्ज और गरीबी का बोझ है, तो दूसरी तरफ कड़ाके की ठंड और फसल बर्बाद होने का डर। यह कहानी दिखाती है कि कैसे मजबूर किसान अपने दुख में एक अजीब सुकून पा लेता है।
प्राइवेट डक तो ख़बरी था, पर धोखे से दुश्मनों के फंदे में आ गया। लगातार तीन तड़पाने वाले दिनों तक, वह एक पत्थर के पीछे दबा पड़ा रहा। जब घोर निराशा छा गई, तो उसने आखिर में सब खत्म करने के इरादे से दुश्मनों पर हमला कर दिया। पर जब होश आया, तो वह वहाँ से दूर एक ठंडी नदी में पड़ा था। वह किसी तरह वापस अपने कैंप पहुँचा। वहाँ का माहौल देखकर उसका दिमाग ही घूम गया। यह उस फौजी की कहानी है जो लड़ाई से तो बच निकला, पर सच्चाई की मार नहीं झेल पाया।
अचानक आए एक बर्फीले तूफ़ान में दो लकड़हारे फँस गए, पर सुबह सिर्फ़ छोटे वाले की साँसें चल रही थीं। उसे ज़िंदगी बख्शी गई, बस एक कड़ी शर्त पर कि उसने उस रात जो देखा, वह कभी उसकी ज़ुबान पर नहीं आएगा। सालों बाद, जब उसकी दुनिया खुशहाल थी, तो वो जमी हुई याद पिघलकर उसके होठों तक आ गई। तब मिनोकिची ने एक भयानक सच जाना, वह सोचता था कि वह राज़ का पहरेदार है, पर असल में वह राज़ ही उसकी साँसों का पहरेदार था। यह कहानी उस कसम की है, जिसे निभाना ही ज़िंदगी थी, और तोड़ना... मौत।
लेवनवर्थ जा रही ट्रेन में, एक महिला को अपना पुराना दोस्त मिला जो एक सख्त मिज़ाज अजनबी के साथ हथकड़ी में जकड़ा था। वे दोनों अजनबी सिर्फ़ एक सीट ही शेयर नहीं कर रहे थे, बल्कि उनके बीच एक गहरा राज़ और लोहे की एक बेड़ी भी थी। बातों-बातों में, एक खूबसूरत झूठ बोला गया ताकि एक आदमी का मान रह जाए। उस एक छोटे से इशारे ने इज्ज़त बचा ली, और उस इज्ज़त ने... एक दिल को टूटने से बचा लिया।
स्काई नदी के उस पार एक गाँव है, जहाँ बिल्लियाँ बहुत सयानी हैं, पर हर कोई उनकी ताकत को नहीं मानता। जब बंजारों का एक रहस्यमयी काफ़िला वहाँ आया, तो दबी हुई दुश्मनी अचानक खुलकर सामने आ गई। नतीजा? एक ऐसी रात जिसने उस गाँव का नक्शा ही बदल दिया। गवाह बनिए उस अजीब कानून के जन्म का, जिसके पीछे था एक बच्चे का आँसू, एक अजीब सी दुआ, और एक खौफनाक बदला।
रमज़ान के बाद ईद का त्योहार आता है। गरीब हामिद अपने दोस्तों के साथ ईदगाह जाता है। जहाँ सब बच्चे खिलौने और मिठाइयाँ खरीदते हैं, वहीं हामिद अपने तीन पैसों से ऐसा कुछ खरीदता है जो त्याग और निस्वार्थ प्रेम का सबसे बड़ा सबक बन जाता है।
बोस्टन की उस कड़ाके की सर्द रात में, भीड़ एक ब्रिटिश सिपाही को उकसाने के लिए जमा हुई। वो उन पर बर्फ भी फेंक रहे थे, और गालियाँ भी; पर उन्हें खबर नहीं थी कि वे अनजाने में इतिहास की चौखट पर खड़े हैं। शोरगुल के बीच अचानक एक आदेश गूँजा, जिसने उस मामूली हंगामे को... एक बड़ी क्रांति में बदल दिया। इस दर्दनाक किस्से में लोगों ने जाना कि बर्फ पिघल जाती है, खून सूख जाता है, पर यादें... हमेशा के लिए अमर हो जाती हैं।
एक आदमी बड़े दावे से कहता था कि 'अजीब घटनाएँ' नाम की कोई चीज़ नहीं होती। तभी एक फरिश्ता सामने आया, जिसने इस बात को एक चुनौती समझ लिया। उस फरिश्ते ने उसे ऐसी मुसीबतों में डाला कि उसकी हड्डियाँ भी टूट गईं और उसका वहम भी। कभी जलता हुआ घर, तो कभी हवा में भागता गुब्बारा। उसने बुरी तरह चोट खाकर यह सीखा कि वह भले ही अजीब घटनाओं पर यकीन नहीं करता, पर अजीब घटनाएँ उस पर पूरा यकीन करती हैं।
नंदू जंगल में मुनाफा तलाशने जाता था, पर उसे वहाँ एक ऐसा अनमोल रिश्ता मिला जिसका कोई मोल नहीं था। एक जानलेवा हादसे और झूठे इल्जामों के बीच, उस आदिवासी लड़की ने अपनी सादगी को ही अपनी ढाल बना लिया। सालों बाद, जब वह दोबारा उम्मीद लेकर गया, तो उसे एक गहरा सबक मिला। उसने जाना कि बाज़ार में सामान तो मिल जाता है, पर सुकून की कोई दुकान नहीं होती। यह उस बंजारे की दास्तान है जो बैलों पर सामान का बोझ लादकर ले जाना चाहता था, पर अंत में उसे यादों का बोझ लेकर लौटना पड़ा।
आपको लगता होगा कि राह चलते किसी से माचिस मांगना कोई बड़ी बात नहीं। लेकिन एक आदमी के लिए यह 'माचिस की तलब' एक कभी न खत्म होने वाली मुसीबत बन गई। जब एक शरीफ से दिखने वाले सज्जन ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया, तो फिर शुरू हुआ तमाशा। उसने ऊपर की जेब देखी, नीचे की जेब टटोली, अंदर की जेब खंगाली... पर माचिस थी कि मिल ही नहीं रही थी। देखते ही देखते, उस अजनबी ने एक छोटी सी मदद को... एक हँसाने वाले, पर सिर दुखा देने वाले बवाल में बदल दिया।
दहेज न लेने के कारण यशोदानन्द की हर ओर वाहवाही हो रही है। वह मंच से बड़े-बड़े सिद्धांत बताते हैं, पर क्या उनके इस त्याग की असलियत कुछ और है?
एक आदमी अपने दोस्त को ढूँढने गया था, पर एक महा-पकाऊ इंसान के हत्थे चढ़ गया। बूढ़े साइमन व्हीलर ने उसे ऐसे कोने में दबोचा कि उसका वक्त भी बर्बाद किया, और मानसिक संतुलन भी। उसने जबरदस्ती उसे एक मेंढक जिसका नाम डेनियल वेबस्टर था की एक बेहद 'गंभीर' दास्तान सुनाई। यह एक ऐसी मजेदार कहानी है जहाँ मेंढक एक खिलाड़ी है, जुआरी एक नंबर का उल्लू है, और सुनने वाला... बेचारा बुरी तरह फँसा हुआ है।
अत्यंत गरीबी में जी रहे बाप-बेटा घीसू और माधव के जीवन में जब एक बड़ी विपत्ति आती है, तो उन्हें समाज से सहायता मिलती है। मगर, ये दोनों उस सहायता का उपयोग अपनी मजबूरी या लालसा के लिए ऐसे ढंग से करते हैं कि आपको इंसानी फितरत पर सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा।
मिस्टर होल्ट अपनी टूटी शादी का गम भुलाने शहर से दूर निकल गए। उन्हें रास्ता तो सुनसान मिला, पर दिल को सुकून नहीं मिला। एक अजीब सी लाल रोशनी उनके पीछे लग गई। वो बाएँ मुड़े, वो दाएँ मुड़े, वो पीछे पलटे। मगर, परछाईं हमेशा उनके आगे थी, और वो जलती रोशनी हमेशा उनके पीछे। यह उस आदमी की कहानी है जो जान-बूझकर खो जाना चाहता था, पर उसे वो मुसीबत मिली जिसे पता था कि उसे कहाँ ढूँढना है।
साल की सबसे कड़ाके वाली रात थी, जब एक अकेली बच्ची ने दीवार पर माचिस की तीली जलाई। अचानक, वह ठंडा और बेजान पत्थर एक खिड़की में बदल गया, और उसे अंदर एक ऐसी दुनिया दिखी जो गर्मी और खुशियों से भरी थी। लेकिन बाहर हवा चीख रही थी, और उसकी उम्मीदें धीरे-धीरे खत्म हो रही थीं। वह दो दुनियाओं के बीच फँसकर रह गई एक तरफ वह अँधेरी सड़क जहाँ उसकी हकीकत थी, और दूसरी तरफ वह सुनहरा सपना जहाँ उसकी चाहत थी। अब सवाल यह है कि जब वह आखिरी तीली भी बुझ जाएगी, तो उस धुएँ के पीछे उसका क्या इंतज़ार कर रहा होगा?
बूढ़ी काकी एक ऐसी कहानी है, जिसमें एक बुज़ुर्ग महिला, अपनी संपत्ति दे देने के बाद भी, अपने ही परिवार में अपमान सहना पड़ता है। यह कहानी रिश्तों, बुढ़ापे के कष्टों और संवेदनाओं को गहराई से दर्शाती है।
हमारे अँग्रेजी दोस्त मानें या न मानें मैं तो यही कहूँगा कि गुल्ली-डंडा सब खेलों का राजा है। अब भी कभी लड़कों को गुल्ली-डंडा खेलते देखता हूँ, तो जी लोट-पोट हो जाता है कि इनके साथ जाकर खेलने लगूँ। न लान की जरूरत, न कोर्ट की, न नेट की, न थापी की। मजे से किसी पेड़ से एक टहनी काट ली, गुल्ली बना ली, और दो आदमी भी आ जाएँ, तो खेल शुरू हो गया।