जापान के मुसाशी प्रांत के एक गाँव में, मोसाकू और मिनोकिची नाम के दो लकड़हारे रहते थे। मोसाकू एक बूढ़ा आदमी था और मिनोकिची अठारह साल का नौजवान था। वे हर दिन जंगल में लकड़ियाँ काटने जाते थे। जंगल के रास्ते में एक नदी थी, जिसे वे नाव से पार करते थे।
एक बहुत ठंडी शाम, जब वे घर लौट रहे थे, एक बर्फीला तूफ़ान आ गया। वे नदी के पास पहुँचे, लेकिन नाविक अपनी नाव को नदी के दूसरे किनारे पर छोड़कर चला गया था। तैरना मुमकिन नहीं था, इसलिए दोनों नाविक की झोपड़ी में रुक गए। झोपड़ी में आग जलाने का कोई साधन नहीं था। वे दोनों दरवाज़ा बंद करके, अपने पुआल से बने रेनकोट ओढ़कर लेट गए, यह सोचकर कि तूफ़ान जल्द ही रुक जाएगा।
बूढ़ा मोसाकू तुरंत सो गया, लेकिन मिनोकिची देर तक जगा रहा। वह तूफ़ान और दरवाज़े से टकराती हुई बर्फ की डरावनी आवाज़ें सुनता रहा। नदी गरज रही थी, और झोपड़ी हिल रही थी। हर पल हवा और भी ठंडी होती जा रही थी। अंत में, ठंड के बावजूद, वह भी सो गया।
वह अपने चेहरे पर गिरती बर्फ़ से जागा। झोपड़ी का दरवाज़ा खुला हुआ था, और बर्फीली रोशनी में उसने एक स्त्री को देखा, जो बर्फ़ सी सफ़ेद थी। वह मोसाकू के ऊपर झुकी हुई थी और अपनी सफ़ेद धुएँ जैसी साँस उस पर छोड़ रही थी। अगले ही पल, वह उसके तरफ़ मुड़ी और ऊपर झुक गई। उसने चिल्लाने की कोशिश की, पर उसके गले से आवाज़ नहीं निकली।
वह उसके ऊपर झुकती गई, जब तक कि उसका चेहरा लगभग उसे छू न लिया; मिनोकिची ने देखा कि वह बहुत ख़ूबसूरत थी, हालाँकि उसकी आँखों से उसे डर लग रहा था। कुछ देर तक वह उसे देखती रही, फिर मुस्करा कर फुसफुसाई: "मैं तुम्हारे साथ भी उस दूसरे आदमी जैसा करने वाली थी। लेकिन तुम पर दया करने से खुद को रोक नहीं पा रही हूँ, क्योंकि एक प्यारे लड़के हो, मिनोकिची। मैं तुम्हें चोट नहीं पहुँचाऊँगी। लेकिन, अगर तुमने कभी किसी को भी इस रात के बारे में बताया, तो मुझे पता चल जाएगा और फिर मैं तुम्हें मार डालूँगी। याद रखना मेरी बात!"
यह कहकर, वह मुड़ी और दरवाज़े से बाहर चली गई। तब मिनोकिची हिल पाया और उठकर बाहर देखने लगा। पर वह स्त्री कहीं दिखाई नहीं दी। बर्फ तेज़ी से झोपड़ी के अंदर आ रही थी मिनोकिची ने दरवाज़ा बंद किया और उसे लकड़ियों से अटका दिया। वह यकीन नहीं कर पा रहा था, उसने सोचा कि क्या यह सब सिर्फ़ एक सपना था। उसने मोसाकू को आवाज़ लगाई, और जब बूढ़े ने कोई जवाब नहीं दिया तो वह डर गया। उसने अँधेरे में हाथ बढ़ाया और मोसाकू का चेहरा छुआ, तो महसूस हुआ कि मोसाकू बर्फ़ की तरह जम चुका था और मर गया था।
सुबह होने तक तूफ़ान थम गया, और जब नाविक वापस आया, तो उसने मिनोकिची को मोसाकू की जमी हुई लाश के बगल में बेहोश पड़ा पाया। मिनोकिची का तुरंत इलाज किया गया, और वह ठीक हो गया, लेकिन उस भयानक ठंड की वजह से वह कई दिनों तक बीमार रहा। वह मोसाकू की मौत से भी बहुत डरा हुआ था; लेकिन उसने उस सफ़ेद स्त्री के बारे में किसी को नहीं बताया। ठीक होने पर, वह फिर से लकड़ियाँ काटने का काम करने लगा।
अगले साल सर्दियों की एक शाम, जब मिनोकिची घर लौट रहा था, तो उसे एक लड़की मिली जो उसी रास्ते पर जा रही थी। वह दुबली-पतली, लंबी और ख़ूबसूरत थी, और उसने मिनोकिची की नमस्ते का जवाब एक मीठी आवाज़ में दिया। फिर वह उसके साथ चलने लगा, और वे बात करने लगे। लड़की ने बताया कि उसका नाम ओ-युकी है; और उसने हाल ही में अपने माता-पिता को खो दिया है। वह यदो जा रही थी, जहाँ उसके कुछ रिश्तेदार उसे नौकरी ढूंढने में मदद कर सकते थे।
मिनोकिची जल्द ही उस लड़की से प्रभावित हो गया; और वह उसे जितना देखता, वह उतनी ही ज़्यादा ख़ूबसूरत लगती। उसने उससे पूछा कि क्या उसकी शादी हो चुकी है; तो उसने हँसकर जवाब दिया कि वह अकेली थी। फिर, उसने मिनोकिची से पूछा कि क्या वह शादीशुदा था, मिनोकिची ने उसे बताया कि घर पर सिर्फ़ एक विधवा माँ है। क्योंकि वह बहुत जवान था, उसने शादी के बारे में अभी तक नहीं सोचा था। इन बातों के बाद, वे काफी देर तक बिना कुछ बोले चलते रहे, और उनकी आँखें दोनों के दिल का हाल बता रही थीं।
गाँव पहुँचने तक वे एक-दूसरे को पसंद करने लगे थे। मिनोकिची ने ओ-युकी से अपने घर पर रुकने के लिए कहा। ओ-युकी थोड़ी शर्माते हुए उसके साथ चली गई। मिनोकिची की माँ ने ओ-युकी का बहुत स्वागत किया और उसके लिए स्वादिष्ट खाना बनाया। ओ-युकी का स्वभाव इतना अच्छा था कि माँ को वह तुरंत पसंद आ गई, और उसने उसे यदो की अपनी यात्रा टालने के लिए मना लिया। ओ-युकी कभी यदो नहीं गई। वह एक अच्छी बहू बनकर घर में रहने लगी।
ओ-युकी एक बहुत अच्छी बहू साबित हुई। लगभग पाँच साल बाद जब मिनोकिची की माँ की मृत्यु हुई, तो उनके आखिरी शब्द अपनी बहू के लिए प्यार और तारीफ़ के थे। ओ-युकी और मिनोकिची के दस लड़के और लड़कियाँ हुए। सभी बहुत सुंदर थे।
गाँव के लोग ओ-युकी को अद्भुत मानते थे, क्योंकि वह सबसे अलग थी। जहाँ ज़्यादातर स्त्रीें जल्दी बूढ़ी हो जाती थीं, वहीं वह, दस बच्चों की माँ होने के बाद भी, उतनी ही सुंदर दिखती थी जितनी पहली बार गाँव आने पर दिखती थी।
एक रात, जब बच्चे सो गए थे, ओ-युकी कागज़ के लैंप की रोशनी में सिलाई कर रही थी। मिनोकिची उसे देखकर बोला: "तुम्हें सिलाई करते हुए, तुम्हारे चेहरे पर रोशनी देखकर, मुझे एक अजीब बात याद आती है जो तब हुई थी जब मैं अठारह का था। तब मैंने किसी को देखा था जो तुम्हारे जैसी सुंदर और गोरी थी। सच कहूँ तो, वह बिल्कुल तुम्हारे जैसी ही दिखती थी।"
बिना सिलाई से नज़र हटाए, उसने पूछा: "मुझे उसके बारे में बताओ। तुम्हें वह कहाँ मिली थी?"
मिनोकिची ने उसे उस भयानक रात के बारे में बताया, और उस सफ़ेद स्त्री के बारे में भी बताया जिसने उसके ऊपर झुककर मुस्कुराते हुए बात की थी, और बूढ़े मोसाकू की मौत के बारे में भी बताया।
उसने कहा, "सोते हुए या जागे हुए, वह एक ही बार था जब मैंने तुम्हारे जितना सुंदर इंसान देखा। बेशक, वह इंसान नहीं थी; और मैं उससे डर गया था, बहुत ज़्यादा डरा हुआ था, लेकिन वह इतनी सफ़ेद थी!... सच कहूँ तो, मुझे कभी यकीन नहीं हुआ कि वह सपना था या वह एक युकी(बर्फ की यक्षिणी) थी।"
ओ-युकी ने अपनी सिलाई फेंक दी, उठकर मिनोकिची के ऊपर झुकी और उसके चेहरे के सामने चिल्लाई: "वह मैं ही थी! मैं ही युकी थी!... मैंने तुमसे कहा था कि अगर तुमने इस बारे में किसी को भी बताया तो मैं तुम्हें मार डालूँगी! पर वहाँ सो रहे इन बच्चों की वजह से, मैं तुम्हें अभी छोड़ रही हूँ! अब तुम उनका अच्छे से ख्याल रखना; क्योंकि अगर उन्हें तुमसे कोई भी शिकायत हुई, तो मैं तुम्हारे साथ वो करूंगी जिसके तुम लायक हो!"
जैसे ही वह चिल्लाई, उसकी आवाज़ पतली होती गई, जैसे हवा रो रही हो। वह एक चमकदार सफ़ेद धुंध में बदल गई, जो छत की शहतीरों से होते हुए धुएँ के रास्ते से बाहर निकल गई। उसे दोबारा फिर कभी नहीं देखा गया।